मैथिली साहित्य केँ नव ऊँचाई प्रदान कयलीह ‘वीणा ठाकुर”

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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मिथिलानी विशेष व्यक्तित्व परिचय

– आभा झा, गाजियाबाद

आइ हम अहि श्रृंखला में जिनकर चर्चा करय जा रहल छी ओ छथि साहित्य सृजन के समर्पित मैथिली लेखिका वीणा ठाकुर।
रचना संसार वृहद अछि। ई बेसी समृद्ध होइत अछि जखन विभिन्न भाषा आर बोली में पठन-पाठन होय। एहने रचना संसार में अपन योगदान देबय वाली लेखिका छथि – वीणा ठाकुर। मैथिली भाषा में गद्य-पद्य के रचना करैत छथि। हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ सेहो सम्मानित कयल गेल अछि। आउ जनकनन्दनी के अंचल सँ आबय वाली वीणा ठाकुर के रचना संसार के दिस दृष्टि डालय छी।
साहित्य सृजन साधना अछि, लेखक अपन अनुभव के ठीक-ठाक पाठक तक पहुँचा दै, तखन सृजन के एक उद्येश्य सफल भ जाइत अछि। लेखिका वीणा ठाकुर सेहो मैथिली आर हिन्दी भाषा में लिखैत छधि। हुनका बचपन सँ पठन-पाठन में रूचि छलनि। ओ छठवीं कक्षा में ही रामचरितमानस पढ़ि लेलनि। एतहि सँ हुनकर साहित्य सृजन के दिस झुकाव बढ़लनि। लगभग 45 वर्ष सँ ओ साहित्य सृजन में संलग्न छथि। हुनकर रचना में ग्रामीण परिवेश आधुनिकता के बीच के द्वंद्व परंपरा साहित्य और संस्कृति के बिंदु देखाइ दैत छलनि।
बिहार के मधुबनी जिला के एक छोट सन गाम में वीणा ठाकुर के जन्म भेलनि। हुनकर प्राथमिक शिक्षा सहरसा में भेलनि। पिता अर्थशास्त्र के प्राध्यापक छलखिन। घरक माहौल अनुशासित छलनि। वीणा कहैत छथि कि – पिताजी के पुस्तक पढ़य के शौक छलनि। जखन ओ कक्षा पांचवी में छलीह तखन उपन्यास पढ़लनि। वीणा ठाकुर के 15 वर्ष के उम्र में विवाह भ गेलनि। विवाहक बाद ओ स्नातकोत्तर आर पीएचडी केलनि। बहुत कम उम्र में ओ लेक्चरर बनि गेली। विवाहक बादो परिवार के सहयोग सँ ओ अनवरत साहित्य सृजन केलनि। वीणा ठाकुर दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग के पूर्व अध्यक्ष सेहो छलीह।
वीणा ठाकुर केँ हुनकर कथा संग्रह ‘परिणीता’ के लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ सम्मानित कयल गेलनि। परिणीता, कुल 12 कथा केर संग्रह अछि। वीणा ठाकुर बतबैत छथि कि – “परिणीता में कथा शामिल भेल अछि, ओ सब आम आदमी के जीवन सँ जुड़ल अछि। बुजुर्ग के समस्या सँ प्रवासी भारतीय तक के परेशानी आर हुनकर जीवन के लऽ कऽ कथा रचल गेल अछि।” डाॅ वीणा ठाकुर बिड़ला फाउंडेशन के प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान सेहो प्राप्त कयलीह। साहित्य अकादमी द्वारा गठित मैथिली भाषा समिति के संयोजिका सेहो छलीह। वीणा ठाकुर केर अन्य रचना में उपन्यास भारती,  कथा संग्रह आलाप, समीक्षा मैथिली रामकाव्य परंपरा, वाणिनी, मैथिली गीत, हाट-बाजार इत्यादि प्रमुख अछि। एकर अलावा विद्यापति गीत, रचनावली, मैथिली प्रबंधकाव्य उद्धव आर विकास सहित दर्जन भरि पुस्तक व पत्रिका केर संपादन केलनि। वीणा ठाकुर कहैत छथि कि, “हम ग्रामीण क्षेत्र में पलल बढ़ल छी। हमर शिक्षा ओतय भेल। यैह कारण अछि कि हमर लेखन में ग्रामीण परिदृश्य देखाइ दैत अछि।” वर्तमान में ओ मैथिली साहित्य के समग्र इतिहास लेखन में जुटल छथि।