मैथिली कथाः अनमोल दहेज

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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कथा

– अंजू झा

कमलकांत बाबू विनम्र स्वभाव के अपन माटि-पानि सं जुड़ल उच्च सरकारी अधिकारी छैथ। परिवार में पत्नी शोभा आ एकमात्र संतान किसलय छथिन। किसलय एखन अविवाहित छथिन। चार्टर्ड अकाउंटेंट किसलय लेल दिन-राति विवाहक लेल अनेकों प्रस्ताव अबैत छैन। लेकिन कमलकांत बाबू मोनेमोन अपन मित्र के सुंदर, मेधावी, शालीन हंसमुख मिलनसार स्वभाव के बेटी संग पुत्र के विवाह तय केने छैथ। कनियां के सेहो बुझल छैन।
एक दिन कमलकांत बाबू बालकनी में बैसल चाय पिबै छलाह। पत्नी शोभा कतौ बाहर सं एलखिन तऽ कमलकांत बाबू देखते प्रसन्न होइत बजला, वाह! आई तऽ आहांक अपन संस्कृति संग लगाव, दहेज़ पर जे भाषण छल ओ, ओहो, ओ पुछू नै, हमरा तऽ आहांक एहेन नीक विचार जे दहेज़ अभिशाप अछि, घर में लक्ष्मीरूपा पुतौह लाउ नै कि दौलतरूपी लक्ष्मी के पाछाँ भागू, सुनि कऽ आइ कतेक प्रसन्नता भेल तकर बखान नञिं कऽ सकै छी। ई सब फोन पर नै सुनि काश हम आहां के संग रहितौं। पत्नी हम्म कहैत घरक भीतर गेली आ कपड़ा बदैल बाहर एली। नोकर चाह लऽकऽ एलैन। चाह पिबैत पति सं पुछलैथ जे राकेश जी के फोन आयल छल परसू अपन बेटी वैभवी संग किसलय के विवाह तय करै लेल एताह। कमलकांत बाबू आश्चर्य सं पत्नी के देखैत बजलाह ऐं यै हम जखन किसलय के विवाह अपन लंगोटिया मित्र दीनबंधू के बेटी किशोरी सं करब तय केने छी तखन बीच में ई राकेश जी कतय सं एलाह।
“What nonsense! what do you mean कतय सं एलाह?”
“देखू अपन भाषा में बात करू हम कतेको बेर मना केने छी हमरा संग अंग्रेजी में गिटिर पिटिर नै करू। एखने आहाँ सोसायटी के पार्टी में सभ्यता संस्कृति पर भाषण दै छलौं, दहेज़ समाजिक अभिशाप अछि तकर डंका पिटै छलौं आ घर अबिते अपन गिटिर पिटिर चालू? आहाँ की कहऽ चाहै छी खुइल कऽ अपन भाषा में कहू।”
शोभा बजली, “देखू हम किसलय के जिंदगी खराब नै करबै। आहाँक दोस्त, ओ दीनहीन, जे पचास गज जमीन के घर में पाँच गोटा रहैया ओतय किन्नहु नै करबय। दाय के जे किछु छैन से खोइंछे में बला बात! हमर की प्रतिष्ठा रहत अहि कुटमैती सऽ? कहि देलौं नै त नै। हम अपन हैसियत प्रतिष्ठा के ख्याल रखैत राकेश जी के एकलौती बेटी के पुतौह बनायब। सोचियौ पाँच हजार स्क्वैर फीट में त खाली बंगला छै आर संपत्ति के त छोड़ू। हमर बेटा के जिंदगी भरिक परेशानी खत्म। यौ आहां बुते त कहियो एहन कुटुम नै भेटतै, ओतऽ सोसायटी सब में हमर समाजसेवी विचार के चर्चा अइ, जाहि कारण सामने सं ई रिश्ता भेटल।”
लेकिन कमलकांत बाबू जिद्द पकैड़ लेला जे किछु भऽ जाय हम संपत्ति के लालच में बेटा के विवाह नै करब। हम किशोरी के पुतौह मानने छी आ सैह हैत। हाँ नै पर दुनू प्राणीक बीच बहस होमय लागल।माता पिता के बीच भेल सब बात किसलय घर में ठाढ़ भऽ सुनलैथ। अपना कक्ष में आबि कऽ किछु बात सोचला फेर अपना एकटा मित्र संग फोन पर किछु बात केला। अगिला दिन किसलय सैर करै के लेल बाहर गेला कनि काल बाद हुनकर मित्र के फोन कमलकांत जी के एलैन जे दुनू गोटे के नजदीक के मंदिर में किसलय बजा रहल छैथ। जखन दुनू प्राणी मंदिर पहूंचलैन तऽ ओतय के नज़ारा देख छुब्ध भऽ गेला। ओतय दीनबंधु अपन बेटी संग सपरिवार, किसलय वरक लिवास में, मंदिर में विवाह के पूरा इंतजाम देख दंग रहि गेला। शोभा तमकैत बेटा के पुछलैन जे ई सब की छै? हम आहाँक भलाई लेल बड्ड पैघ घरक बेटी के तकने छी। किसलय माँ के पकड़ि शांत करबैत कहलैन जे देखू हम आहाँ दुनू में सं किनको एकगोटा के पसंद सं विवाह कऽ सकै छी। तऽ कियैक ने हम ओहि लड़की सं विवाह करी जाहि में हमर भलाई के संग आहूँ सभक मान सम्मान बढ़ै। माँ! राकेश जी के बेटी अपना संग दौलत जरूर लऽ कऽ एती, लेकिन जे आदर मान आहाँ के किशोरी आ हिनक परिवार सं भेटत ओ कहियो राकेश जी नै देता। एकर इतर माँ हमरा अपना पर भरोसा अछि हम राकेश जी के द्वारा देल संपत्ति अर्जित कऽ लेब लेकिन किशोरी वला संस्कार वैभवी में हेतैन की नञिं तकर कोनो साक्ष्य नहिं। भले किशोरी संपत्ति संग नहिं अनती लेकिन कि हिनक शिक्षा, संस्कार आ शालीनता के कोनो मोल नहिं?? ई #दहेज़_अनमोल अछि माँ #अनमोल अछि।
आहाँ दुनू गोटे के पसंद पर बहुत सोचला के बाद हम आइ किशोरी संग विवाह करै लेल दीनबंधु जी ओतय आयल छलौं लेकिन हिनकर सबके विचार जे बिना आंहाँक सहमति सं विवाह उचित नञिं। तैं आहाँ सबके बजेलौं। माँ, अहि विवाह सं आहाँक प्रतिष्ठा बढ़त। माँ, समाज के लेल आहाँ उदाहरण हैब। आब कहू आहाँके कि निर्णय??
शोभा जी कनि देर सोचलैथ आ आगू बढ़ि किशोरी के माँ के हाथ पकड़ि बजली आइ के बाद हमरा पुतौह पर अपन हक नै देखायब। ई बात सुनिते ओतय उपस्थित सब जन हँसय लगलाह।