मिथिला विभाजन दिवस यानि ४ मार्च पर उपवास कार्यक्रमक संग वेबिनारक आयोजन

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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८ मार्च २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!!

(ई समाचार विलम्ब सँ देबाक लेल अग्रिम क्षमायाचना)

४ मार्च १८१६ ई. सुगौली सन्धि लागू हेबाक तारीख थिक। यैह दिन सँ मिथिलाक पुण्यभूमि क्रमशः दुइ सार्वभौम सम्पन्न राष्ट्रक सीमा मे बँटि गेल, कहि सकैत छी बाँटि देल गेल। चूँकि मिथिला कतेको शताब्दी सँ अपन राजकीय स्वरूप मे नहि अछि, केवल ऐतिहासिक, पौराणिक, भाषिक, सांस्कृतिक आ भावनात्मक अवस्था मे जीवित सनातन सभ्यता मिथिला मे कतेको रास छोट-पैघ राजाक राज्य रहल जेकरा अन्ततोगत्वा ब्रिटिश इंडिया सरकारक कर्णधार द्वारा नेपालक तत्कालीन शाह वंशीय राजाक संग समझौता करैत मिथिलाक उत्तरी सीमाक्षेत्रक विशाल भूभाग नेपालक सीमा मे मिला देल गेल आर बाकी ब्रिटिश शासित भारतहि मे रहल जे आब स्वतंत्र भारतक हिस्सा थिक। मिथिलाक्षेत्रक राजनैतिक पहिचान लेल ‘मिथिला राज्य’ स्थापनाक मांग भारत व नेपाल दुनू देश मे कतेको दशक सँ कयल जाइत रहल अछि जे हाल धरि लम्बिते अछि कहि सकैत छी। भारतक बिहार राज्य व झारखंड राज्य धरि भाषाक आधार पर मिथिलाक्षेत्र अवस्थित कहल जाइत अछि, तहिना नेपाल मे सेहो भाषहि केर आधार पर कुल ११ जिलाक भूभाग मिथिलाक्षेत्र मानल जाइत अछि। एहि तरहें दुइ सार्वभौमसम्पन्न राष्ट्र मे मिथिला विभाजित होयबाक आन्तरिक कष्ट केँ अनुभूति करैत आबि रहला मिथिलाक प्रखर सपूत बी. के. कर्णा द्वारा विभाजनक २०० वर्ष पूरा होयबाक वर्ष यानि २०१६ सँ हरेक वर्ष ४ मार्च केर दिन ‘उपवास’ रखबाक कार्यक्रम आयोजित होइत आबि रहल अछि, संगहि हुनक आह्वान पर आरो दर्जनों लोक उपवास रखैत छथि एहि दिन आर एहि वर्ष ४ मार्च केँ उपवासक संग-संग एकटा महत्वपूर्ण वेबिनारक आयोजन सेहो कयल गेल जाहि मे बहुत रास वक्ता लोकनि वर्तमान समय मे मिथिलाक स्थिति-अवस्थिति विषय पर गूढ मन्थन सेहो कयलनि।

विदित हो जे ई सारा आयोजन ‘मिथिला मन्थन’ नामक बैनर तहत कयल गेल। मिथिला मन्थन पूर्वहु मे मिथिलाक औद्योगिक विकासक संग राजनैतिक स्वरूप निर्माणार्थ विभिन्न सान्दर्भिक व सारगर्भित विषयादि पर गम्भीर विमर्श करैत आबि रहल अछि। वर्तमान समय मिथिलाक भूगोलविहीनता आ भावनात्मक अवस्थिति विषय पर उपरोक्त वेबिनार मे अररिया, पूर्णिया, विराटनगर, हैदराबाद, दरभंगा, दिल्ली आदि सँ संस्थागत प्रतिनिधित्वक संग अभियानी व्यक्तित्व लोकनि अपन महत्वपूर्ण विचार सब रखने रहथि। एहि कार्यक्रमक मुख्य संयोजक स्वयं बी. के. कर्णा छलाह, तहिना सह-संयोजक मिथिला मन्थनक उपाध्यक्ष मृत्युञ्जय ठाकुर रहथि। सहभागी वक्ता मे डा. मारूफ हुसैन, रोहित यादव, डा. वसीम राजा लौर्ड, अविनाश भरद्वाज एवं प्रवीण नारायण चौधरी रहथि।

मिथिला मन्थनक अध्यक्ष सह कार्यक्रम संयोजक बी. के. कर्णा द्वारा संचालित एहि वेबिनार मे मिथिला सम्बन्धित विभिन्न महत्वपूर्ण विषय – यथा “इतिहास मे मिथिला”, “भौगोलिक दृष्टि सँ मिथिला”, “सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि सँ मिथिला”, “वर्तमान मे मिथिला”, “भारत और नेपाल सरकार केर दृष्टि सँ मिथिला केँ मान्यता” – एहि शीर्षक मे सहभागी वक्ता द्वारा विचार राखल गेल छल। मिथिलाक वर्तमान भूगोल मे बाजल जायवला मैथिली भाषा केँ प्राथमिकता दैत आन सब भाषा जेना भोजपुरी, हिन्दी, नेपाली आदि मे सेहो वक्ता स्वतंत्रता सँ अपन विचार राखलथि। सभक जोर एहि विन्दु पर रहलनि जे एतेक प्राचीन इतिहास आ समृद्ध सभ्यताक पहिचान सहितक भूभाग मिथिला केँ पुनर्जीवित करबाक लेल उच्चस्तर पर जनजागरण करबाक जरूरत अछि आर संगहि राज्य (भारत व नेपाल) द्वारा सेहो मिथिलाक संरक्षण लेल विशेष योगदान देबाक जरूरत अछि। मिथिला मन्थन एहि तरहक आयोजन संग आरो विभिन्न स्तर पर मिथिला केँ पुनः जियेबाक लेल काज करैत रहबाक वचनबद्धता सेहो प्रकट कयलक। सहभागी वक्ता लोकनि केँ धन्यवाद देबाक संग सहभागिता लेल प्रशंसा पत्र देल गेलनि।