“मिथिला के प्रसिद्ध और पवित्र स्थान में सं एक”

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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बेबी झा।                         

# यात्रा # मिथिलाक पवित्र आ प्रसिद्ध स्थानक

मिथिलाक धरोहर पर्यटन एवं धार्मिक स्थान ” माँ भद्रकाली मंदिर कोइलख🙏🙏 ” स जुड़ल जेना, हम देखैत आ सुनैत अयरहु अछि किछु बात साझा कय रहल छी |
कोइलख भगवती भद्रकाली 🙏🙏 मिथिलाक प्रसिद्ध गाम में गिनल जाईत अछि | ई राजनगर प्रखण्ड आ मधुबनी जिलाक अन्तर्गत अबैत अछि जे मधुबनी स लगभग तेरह – चौदह किलोमीटरक दूरी पर अवस्थित अछि |ई मूर्ति कोनो व्यक्ति विशेष द्वारा अवस्थित नहि अपितु सैकड़ो वर्ष पूर्व गामक पश्चिम ” लक्ष्मणा ” नदी लग कोईला मोईनिक खोदाई काल कारी रंगक अद्भुत चमकैत ग्रेनाइट पाथरक लगभग तीन फिटक मूर्ति उखरलिह |एहि स पहीने ओहि गामक नाम वासुदेवपुर छल जे, भद्रकाली कोईला मोनि स निकलबाक कारण “कोइलख देवी 🙏🙏” के नाम स प्रख्यात भेलिह आ हुनकरे नाम पर ओहि गामक नवीन नामकरण कोइलख परल |कहल जाईछ जे, कोईला मौनि स प्राप्त षष्ठी दिन भद्रकाली🙏🙏 नामक भगवती रंक्षिका – संरक्षिका भेलिह |
ई भगवती पहीने चारक कुटी में रहैत छली आ १८३४ ई में एकटा भव्य मंदिर में विराजमान भेलिह | ओकर बाद स दिनोदिन ओहि मंदिर आ सर्वजामक बढोत्तरी होईत गेल | मंदिर एकटा विशाल प्रांगण में अवस्थित अछि जतय प्राकृतिक छटा देखते बनैत अछि कोनो एहन वृक्ष नहि जे प्रांगण मे उपलब्ध नहि | फल – फूल स लदल वृक्ष आ पानि स भरल पोखरि – इनार लगैत अछि जेना भद्रकाली🙏🙏 के बारंबार झूकि – झूकि कय नमन् करैत अछि संगहि गुलेती गाछक गोल चबूतरा पर बैसि शांतिपूर्ण वातावरण में लोक भगवतीक सान्निध्यताक संग प्रकृतिक सान्निध्यताक सेहो आनंद लैत अछि | एहि ठाम तीन दिस स निकाल अछि जेबाक लेल अलग आ निकलबाक लेल अलग संगहि एकटा द्वार उच्च विद्यालय स जुडल अछि संगहि पोखरिक महाड़ पर मध्य विद्यालय | एहि गामक विशेषता अछि जे, ” दूर्गा पूजा ” में गणमान्य स गणमान्य व्यक्ति गाम अबेत छथि आ बढि – चढि कय पूजाक ओरियान में हिस्सा लैत छथि ओतबे नहि पूजा के आर बेसी मनोरम बनेबाक लेल नाटकक मंचन सेहो गामक जानल – मानल व्यक्ति करैत छथि बाहरक कोनो कलाकार नहि मात्र “नटुआ” जे कुमारी भोजन , बलिप्रदानक काल नचबाक लेल शुभ मानल जाईत अछि | दस कोशीक लोक आ दूर दूर स भगवतीक दर्शनक आ मानल चढाबा चढेबाक लेल दुर्गापूजा के कहय अनदिनो अबैत छथि | भगवती सबहक मनोकामना पूर्ण करैत छथि | हिनकर पूजाक लेल कयक टा पंडा नियुक्त छथि जिनकर अलग – अलग कार्यक्षेत्र अछि | मुदा, कोनो चढाबाक लेल कोनो पूर्जी नहि कटैत अछि सब अप्पन स्वेच्छा अछि | कहल जाईछ जे भद्रकालीक आवागमणक बाद एक स एक विद्वान व्यक्ति गाम में भेलाह आ मात्र पुरा गाम में भद्रकाली🙏🙏 पूजा होईत आयल अछि |पुरा गाम में मात्र ई भगवती पूजनीय छथि समस्त ग्रामवासी हिनका अप्पन इष्ट मानैत छथि |
मात्र धार्मिक नहि अपितु ऐतिहासिक दृष्टि स सेहो ई गाम प्रख्यात अछि |कहल जाईछ जे, ई गाम अमरावतीक नगरकक प्रमुख व्यापारिक केंद्र छल | अमरावतीक विस्तार आजुक ” चपाही ” सं ” सरिसोपाही ” धरि अछि |कतेको राजा – महाराजा सैनिक छावनि बनौने रहथि आ भद्रकालीक पूजा – अराधना कय विजयी प्राप्त कयलाह |
एहि गाम में, व्याकरण, ज्योतिष, न्याय, कवित्व, कर्मकांड , कला, वेदक संगहि मैथिलीक अनेकानेक साहित्यकार होईत अयलाह जे, अप्पन – अप्पन क्षेत्र में, पूर्ण पतिष्ठा स सम्मानित छलाह |
कोइलखक भद्रकाली भगवती 🙏🙏 सिद्ध पीठक नाम प्राप्त कय लेने छथि | समस्त मिथिलावासी स निवेदन🙏 जे , एकबेर भद्रकाली🙏🙏 भगवती के दर्शन जरूर करी |भद्रकाली कोइलख भगवती🙏🙏 के जय 🙏🙏|