“कहौतिया : विश्वसनीय संवादवाहक”

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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भावेश चौधरी।                       

कहौतिया – मिथिलांचलक ओ संवाद वाहक,जिनकर प्रयोजन वर पक्ष द्वारा कन्या पक्ष के दुरागामनक तिथि आओर मुहूर्त के सूचित करय में होईत छैन।कहौतिया सुइनते मिथिला में ऐकर विशेष अर्थ बुझा जायत अई।ओना ता आधुनिक मैथिल लोकनि के लेल ई शब्द अधिकांशतः अबूझ बनल जा रहल छैन। अहि शब्द आओर प्रथा के विलोपन में संचार माध्यम के सरलीकरण व आधुनिकरण के सेहो बड़का हाथ।लेकिन एखनो किछु जगह पर कहौतिया के व्यवहार बनल अई। पहिने विवाह आओर दुरागमन के बीच में लम्बा समयावधि रहैत छल(किछु अपवाद छोरि)! प्रायः एक साल वा केखनो केखनो तीन साल तक। एखुनका समय जेका फोन और ई मेल बला त्वरित और गुप्त संचार व्यवस्था नै रहै। ताहि दुआरे दुरागमन के समय के सूचना विश्वशनीय संवाददाता द्वारा भेजल जायत रहई। अहि लेल प्रायः हज्जाम के जिम्मेदारी देल जायत रहैन। ऐहन हज्जाम जे गुप्तचर, मनोवैज्ञानिक आओर वाकपटुता में निपुण रहैत छेला।लाल धागा आ सिंदूर के गद्दी संगे जेखन ई हज्जाम कन्यापक्ष के घर पहुचैत छेला ता हुनका “कहौतिया”शब्द के अलंकार सा अलंकृत कायल जाएत रहैन। हिनकर आबय के सूचना भेटते वधु लोकनि नोर झोर होबैत लगैत छेली।कहौतिया सा समाचार लय के हुनका निक निकुत भोजन व नव धोती द्वारा स्वागत सत्कार आ विदाई होईत छैन। तिथि स्वीकार नई करबाक संकेत लाल डोरी के वापसी होई छै।स्वीकार केला पर दुरागमनक तैयारी आ समाज में सूचना देल जायत अछि।ओना ता आब फोन द्वारा पल पल के सूचना आ समाचार दूनू पक्ष द्वारा साझा भा जाईत अई,तथापि कतेक जगह एखनो ई प्रथा के विलोपन सा बचबई लेल कहौतिया के भेजल जायत छनि।अपन मिथिलांचल में हर जाति व वर्ग विशेष के सब शुभ वा अशुभ कार्य में किछु ने किछु जिम्मेदारी रहैत छनि,जे वाह वर्ग द्वारा करय पर फलित मानल जायत अई। ई सब प्रथा पूरा समाज के एक संगे जोईड़ के रखई लेल महत्वपूर्ण अई।आब लोकक कमी आ लोकक लग समय के कमी सेहो अहि प्रथा में रुकावट बैनि रहल अय।लेकिन कतेक जगह एकर जानकारी नै होबै के कारण सेहो एकर विलोपन होईत जा रहल अई।आधुनिकता में प्रवेश करैत हम सब मिथिलावासी विभिन्न कारण सा अपन कतेको सांस्कृतिक कार्यक्रम के बिसरैत जा रहल छी।एहन समय में “दहेज मुक्त मिथिला” मंच द्वारा एकर जानकारी पर चर्चा करई लेल हुनका साधुवाद।जय मिथिला,जय मैथिली।