अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता – वर्तमान पीढीक आवश्यकता विषय पर परिचर्चा

१७ पुष २०२६, बिहीबार ००:००
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४ जुलाई २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!!

दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह पर वेबिनार – अंग्रेजी भाषाक आवश्यकता 

काल्हि शनि दिन ३ जुलाई २०२१ दहेज मुक्त मिथिलाक फेसबुक समूह पर ‘अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता – वर्तमान पीढीक आवश्यकता’ विषय पर एकटा अंग्रेजी परिचर्चा कार्यक्रमक आयोजन कयल गेल। एहि मे युवा पीढी सँ अभिभावक वर्ग केर वक्ता लोकनि भाग लेलनि। सब कियो वर्तमान युग मे अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता पर अपन विचार दैत अंग्रेजी सिखब अत्यन्त आवश्यक आ अनिवार्य रहबाक बात कहलनि। अंग्रेजी पढाई करनिहार लेल त सहजे होइत छैक सिखनाय, लेकिन सरकारी विद्यालय विद्यमान शिक्षा पद्धति अनुसार अंग्रेजी शिक्षा कक्षा ६ सँ प्रारम्भ होयबाक आ अंग्रेजी पर विशेष ध्यान नहि दय पेबाक कारण कतेको छात्र लेल ई विषय भारी बनि जाइछ, तेहेन अवस्था मे अंग्रेजी सिखबाक लेल कोन सहज रास्ता अपनेबाक चाही ताहि विन्दु पर सेहो सहभागी वक्ता लोकनि अपन विचार देलनि। अंग्रेजी वास्तव मे मातृभाषाक शब्द लेल उचित अंग्रेजी शब्दकोश संग अनुवाद करबाक सिद्धान्त पर सिखल जाइत अछि, आर बाजय लेल बेसी सँ बेसी अभ्यासक जरूरत होइत छैक। व्याकरणिक शुद्धता केँ बिना ध्यान देने आ गलती बजबाक लाज अथवा भय बिना मात्र अंग्रेजी नीक बाजल जेबाक अभ्यास कयल जा सकैत अछि – मोटामोटी सब वक्ता एहि विन्दु पर जोर देलनि।
 
ई कार्यक्रम चूँकि मैथिली भाषाभाषीक संग आयोजित छल, आर मैथिलीभाषी अपन मातृभाषा छोड़ि आन भाषाक प्रयोग बाध्यकारी परिस्थिति मे मात्र करैत छथि, मुदा वर्तमान फैशनक युग मे बहुतो लोक अपन भाषा केँ अपमान करैत आने-आन भाषा बजबाक प्रवृत्ति सेहो रखैत छथि, तेँ एहि कार्यक्रमक नामकरण ‘अंग्रेजी झाड़बाक कम्पीटिशन’ राखल जेबाक बात आयोजक-संयोजक प्रवीण नारायण चौधरी स्पष्ट कयलनि। तखन नामक गलत अर्थ आ नकारात्मकता केँ छोड़ि एकर सकारात्मक पक्ष पर ध्यान दैत वर्तमान युग आ विशेष रूप सँ युवा पीढी लेल रोजी-रोजगार सँ लैत शिक्षाक क्षेत्र मे, तकनीक केर क्षेत्र मे, इन्टरनेट, मोबाइल आदि मे अंग्रेजीक कतेक पैघ उपयोगिता छैक से देखैत एहि परिचर्चाक लाभ मिथिला समाज केँ भेटय ताहि लेल ई आयोजन दहेज मुक्त मिथिला मंच पर कयल जेबाक बात सेहो ओ बतेलनि।
 
एहि कार्यक्रम मे सहभागिता देनिहार मे अम्बिका चौधरी, भावना चौधरी, श्रुति चौधरी, देवांशी चौधरी, प्रियशील चौधरी, अनिशा झा, झा पंकज, चन्दन कुमार झा, सानू सागर, प्रदीप कुमार, मंजूषा झा, राजेश ठाकुर, महेश झा, सुमन सौरभ झा, सीमा झा, ए के मिश्रा एवं केशव चौधरी प्रत्यक्ष रूप सँ जुड़िकय अपन विचार रखलनि; तहिना दर्जनों सहभागी लोकनि अपन विचार कमेन्ट के मार्फत सेहो रखलनि। अंग्रेजी भाषा वर्तमान पीढी लेल रोजी-रोजगार मे सेहो बहुत बेसी मददगार सिद्ध होयबाक कारण एकरा सिखब बहुत जरूरी अछि, एहि लेल जीवनोपयोगी दैनिक दिनचर्या सँ जुड़ल ६० गोट वाक्य अपन मातृभाषा मे लिखि ओकरा अनुवाद करैत, रैपिडेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स टाइप के किताब आ ट्रान्सलेशन बनेबाक किताब सभक सहयोग सँ ई काज बहुत आसानी सँ कयल जा सकैत अछि, काल्हिक संवाद मे स्पष्ट रूप सँ यैह निष्कर्ष सोझाँ आयल छल।